अलग-अलग पिच और उनका खेल पर असर
भारतीय उपमहाद्वीप की पिचें आमतौर पर स्पिन गेंदबाज़ों को मदद देती हैं — मिट्टी सूखने पर दरारें पड़ती हैं और गेंद तेज़ी से टर्न होती है। इसके उलट, इंग्लैंड या न्यूज़ीलैंड की हरी घास वाली पिचें तेज़ गेंदबाज़ों को स्विंग और सीम मूवमेंट देती हैं। चेन्नई की लाल मिट्टी और जयपुर जैसे शुष्क मैदानों की पिचें पाँचवें दिन बिल्कुल अलग व्यवहार करती
हैं। पिच की नमी, घास की परत और तापमान — ये तीन चीज़ें मिलकर तय करती हैं कि मैच किस ओर जाएगा। यह सारी जानकारी केवल क्रिकेट की समझ बढ़ाने के लिए है।